Nafrat Shayari
Explore the most powerful Nafrat Shayari to express the pain of heartbreak, betrayal, and anger. Deep, emotional verses that speak the truth of lost love.
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नफ़रत नहीं है तुझसे,
बस अब फर्क पड़ना बंद हो गया है।
नफ़रत सीखनी पड़ी हमें,
जब भरोसे ने धोखा दिया।
तेरी मौजूदगी से नफ़रत नहीं,
तेरी सोच से परेशानी है।
नफ़रत तब हुई जब समझ आया,
कि झूठ भी मुस्कुरा सकता है।
अब नफ़रत भी सोच-समझकर करते हैं,
हर कोई इसके लायक नहीं होता।
तेरे लिए नफ़रत नहीं बची,
अब तो बस दूरी काफी है।
नफ़रत की वजह तुम नहीं,
तुम्हारी फितरत है।
अब नफ़रत भी सुकून देती है,
क्योंकि उम्मीद खत्म हो चुकी है।
नफ़रत इतनी भी नहीं कि बदनाम करें,
बस नजरअंदाज करना सीख लिया है।
नफ़रत की हद तब पार हुई,
जब इंसानियत दिखावे में मिली।
अब नफ़रत जताने की ज़रूरत नहीं,
खामोशी ही काफी है।
नफ़रत की शुरुआत वहीं हुई,
जहाँ झूठ को सच बताया गया।
तुम से रिश्ता अब कुछ ऐसा है, ना नफ़रत है, ना इश्क़ पहले जैसा है।
लेकर मेरा नाम वो मुझे कोसता है, नफ़रत ही सही, पर वो मुझे सोचता तो है!
बेहद गुस्सा करते हो आजकल, नफ़रत करने लगे हो, या मोहब्बत ज्यादा हो गई।
नफ़रत मत करना हमसे हमें बुरा लगेगा, प्यार से कह देना तेरी जरूरत नही है।
कोई पूछे अगर तुमसे मेरी कहानी, कह देना, नफ़रत के भी काबिल नही था.!
कुछ दग़ाबाज़ी हम भी तेरे ऐतबार से करेंगे, तुझसे नफ़रत भी जालिम बड़े प्यार से करेंगे।
नफ़रत नहीं थी तुझसे कभी,
बस तेरा सच जानकर दिल टूट गया।
नफ़रत तब पैदा होती है,
जब उम्मीदें हद से ज़्यादा हों।
जिसे दिल से चाहा था,
आज उसी से दूरी पसंद है।
नफ़रत करना मेरी फितरत नहीं,
पर मजबूरियाँ बना देती हैं।
अब शिकायत भी नहीं करते,
नफ़रत में भी थकान होती है।
तेरे बदले हुए अंदाज़ ने ही,
नफ़रत करना सिखा दिया।
नफ़रत का कारण तू नहीं,
तेरी झूठी बातें थीं।
अब नफ़रत भी शांति से करते हैं,
क्योंकि लड़ना छोड़ दिया है।
तेरी हर बात अब चुभती है,
शायद यही नफ़रत की शुरुआत थी।
नफ़रत में भी सलीका रखा है,
तुझसे दूर रहकर जी लेते हैं।
तेरी मौजूदगी अब भारी लगती है,
नफ़रत भी मजबूरी बन गई है।
नफ़रत इसलिए नहीं कि तू बुरा है,
बल्कि इसलिए कि तू बदल गया है।
हंसती खेलती जिंदगी वीरान लगने लगती है, जब भरोसा कोई एक तोड़ता है, और नफ़रत सबसे होने लगती है।
नफ़रत बता देती है, मोहब्बत कितने कमाल की थी।
नफ़रत है उस लम्हे से, जब तुम याद आते हो।
ना कोई शिकवा ना कोई ग़म, अब जैसी दुनिया वैसे हम।
जब वो शख़्स दिल से ही उतर गया, तो फिर क्यों सोचें कि किधर गया।
कोई तो हाल-ए-दिल अपना भी समझेगा, हर शख्स को नफरत हो जरूरी तो नहीं !