Alone Shayari
Explore a collection of deep and emotional Alone Shayari that reflects the pain, beauty, and introspection of solitude. Perfect for those seeking solace through words.
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अकेले रहना अब डर नहीं लगता,
यह खुद को समझने का वक्त देता है।
भीड़ में भी अकेले रहे हमने,
अब तन्हाई ही सच्ची साथी लगती है।
अकेलापन दर्द नहीं रहा अब,
यह सुकून की आदत बन गया है।
कुछ लोग साथ होकर भी दूर होते हैं,
और कुछ दूर होकर भी बहुत पास।
अकेले रहकर बहुत कुछ सीख लिया,
सबसे ज़रूरी खुद को समझना।
अब किसी की कमी से फर्क नहीं पड़ता,
अकेलापन अब अपना सा लगता है।
हम अकेले ही ठीक हैं,
कम से कम उम्मीदें तो नहीं टूटतीं।
तन्हाई ने सिखा दिया है मुझे,
हर कोई अपना नहीं होता।
अकेले चलना मुश्किल ज़रूर है,
पर किसी पर बोझ नहीं बनना पड़ता।
अब हम खामोश रहते हैं,
क्योंकि अकेलापन शोर से बेहतर है।
अकेलापन हर किसी को मिलता है,
फर्क बस इतना है कि कोई निभा लेता है।
हमने तन्हाई को अपनाया है,
अब खुद से कभी दूर नहीं रहते।
मुझको मेरी तन्हाई से अब शिकायत नहीं है, मैं पत्थर हूँ मुझे खुद से भी मोहब्बत नहीं है..!!
तन्हाई रही साथ ता-जिंदगी मेरे, शिकवा नहीं कि कोई साथ न रहा..!!
आदत बदल गई है वक्त काटने की, हिम्मत ही नही होती दर्द बांटने की।
टूटे हुए काँच की तरह चकनाचूर हो गए, किसी को चुभ न जाएं इसलिए दूर हो गए।
उदास तो बहुत रहे मगर कभी जाहिर नही किया, ठीक हूं, बस इस लफ्ज़ ने सब संभाल लिया।
कुछ कर गुजरने की चाह में कहाँ-कहाँ से गुजरे, अकेले ही नजर आये हम जहाँ-जहाँ से गुजरे..!!
अकेलापन अब बोझ नहीं लगता,
यह खुद से जुड़ने का रास्ता बन गया है।
कभी किसी के लिए अकेले थे,
अब अकेले रहना ही सुकून है।
अब साथ की ज़रूरत नहीं लगती,
तन्हाई खुद ही काफी है।
अकेलेपन ने मजबूत बना दिया,
अब किसी सहारे की आदत नहीं।
जब सब चले गए तब समझ आया,
अकेले रहना भी एक हुनर है।
अब शिकायतें कम हो गई हैं,
क्योंकि उम्मीदें अकेले में टूट जाती हैं।
तन्हाई ने सिखा दिया है,
खुद का ख्याल कैसे रखा जाता है।
अब अकेले रहना सज़ा नहीं,
यह मेरी पसंद बन गई है।
अकेले रहकर समझ आया,
हर रिश्ता ज़रूरी नहीं होता।
तन्हाई में खुद से बातें होती हैं,
जो भीड़ में कभी नहीं हो पाईं।
अब हम किसी को खोने से नहीं डरते,
क्योंकि खुद को पा लिया है।
अकेले रहना सिखा गया है,
खुद की कद्र कैसे की जाती है।
एक वो था बदल गया, एक मैं था बिखर गया, एक वक्त था गुजर गया।
जैसे कोई बच्चा रोते रोते थककर सो जाता है, हमारे दिल का हाल अक्सर कुछ ऐसा ही हो जाता है।
जिन से खत्म हो जाती हैं उम्मीदें, उनसे फिर शिकायत नही रहती।
हजारों महफिलें हैं और लाखों मेले है, पर जहाँ तुम नही वहां हम अकेले हैं।
बर्बादियों का हसीन एक मेला हूँ मैं, सबके रहते हुए भी बहुत अकेला हूँ मैं..!!
कितनी अजीब है इस शहर की तन्हाई भी, हजारों लोग हैं मगर कोई उस जैसा नहीं है..!!