2 Line
Read the best collection of 2 Line Shayari with deep meaning. Short, emotional, and heart-touching two line poetry in Hindi..
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खामोशी भी बहुत कुछ कह जाती है,
जब शब्द साथ छोड़ देते हैं।
कुछ रिश्ते सवाल नहीं करते,
बस हाल समझ लेते हैं।
तेरा ख्याल भी सुकून देता है,
मुलाक़ात तो फिर खास ही होगी।
हमने छोड़ना सीख लिया है,
वरना दिल आज भी बच्चा है।
वक्त ने सिखा दिया चुप रहना,
वरना हर बात का जवाब था।
तेरे बिना भी जी लेते हैं,
बस जीने का मज़ा नहीं आता।
कुछ बातें अधूरी ही अच्छी हैं,
पूरी हों तो दर्द बन जाती हैं।
हम बदल नहीं रहे,
बस समझदार हो रहे हैं।
तेरी एक झलक काफ़ी है,
दिन को बेहतर बनाने के लिए।
हर किसी से उम्मीद नहीं रखते,
इसलिए अक्सर खुश रहते हैं।
तू समझे या ना समझे,
मगर दिल आज भी तेरा है।
हमने खुद को संभाल लिया है,
अब किसी के सहारे की ज़रूरत नहीं।
मुहब्बत बुरी है बुरी है मुहब्बत, कहे जा रहे हैं, किये जा रहे हैं…
नज़र, नमाज़, नज़रिया सब कुछ बदल गया इक रोज़ मुझे इश्क़ हुआ और मेरा खुदा बदल गया..
वो इस अंदाज़ में मुझसे मोहब्बत चाहती है, मेरे ख्वाब में भी अपनी हुकूमत चाहती है.!!
मुद्दतों बैठे रहे हम तेरे एहसास के साथ दूर के दूर रहे और पास के पास…
सुलगते लम्स की खुशबू हवा में छोड़ गया, वो जो हमसफर था, सफर में छोड़ गया…
राह तकते जब थक गई आंखे फिर तुझे ढूंढने मेरी आंख के आसूं निकले..
हमने खुद को वक्त के हवाले कर दिया,
अब जो होगा, सुकून से होगा।
दिल को समझाना सबसे मुश्किल होता है,
क्योंकि ये तर्क नहीं, एहसास मानता है।
कुछ लोग यादों में ही ठीक रहते हैं,
हक़ीक़त में वो बदल जाते हैं।
हमने मुस्कुराना छोड़ नहीं दिया,
बस वजहें बदल गई हैं।
तन्हाई से अब डर नहीं लगता,
ये खुद से मिलने का मौका देती है।
हमने भी उम्मीदें कम कर ली हैं,
अब दिल जल्दी नहीं टूटता।
तेरी कमी हर जगह महसूस होती है,
चाहे भीड़ हो या सन्नाटा।
अब किसी से शिकायत नहीं करते,
जो जैसा है, वैसा स्वीकार है।
कुछ ख्वाब अधूरे ही अच्छे हैं,
पूरे हों तो कहानी खत्म हो जाती है।
हमने भी खुद से दोस्ती कर ली है,
अब अकेलापन भारी नहीं लगता।
तू पास हो या दूर फर्क नहीं पड़ता,
एहसास आज भी उतना ही गहरा है।
अब दिल को समझ आ गया है,
हर रिश्ता निभाने के लिए नहीं होता।
वक्त भी…कैसी पहेली दे गया… उलझने सौ… जां अकेली दे गया…
दिल की तकलीफ़ कम नही करते, अब कोई शिकवा हम नही करते…
ज़मीन पर मेरा नाम वो लिखते और मिटाते हैं, वक्त उनका तो गुज़र जाता है, मिट्टी में हम मिल जाते हैं…
दिल ना उम्मीद तो नही…. नाकाम ही तो है, लंबी है गम की शाम मगर शाम ही तो है…
अगर, मगर, और काश में हूं… फिलहाल मैं अपनी ही तलाश में हूं…
लफ्जों में क्या लिखूं उस रब की तारीफ में, जो मांगू तो नवाज़ देता है, न मांगे तो बेहिसाब देता है।